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	<title>kushwaha</title>
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		<title>kushwaha membership</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Amit]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 03 Sep 2016 07:23:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[members]]></category>
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					<description><![CDATA[Kushwaha.in started in  2009  its  almost  7 years  we keep publishing  articles  regarding our history, we keep adding  peoples with years , kushwaha samaj appreciate our  steps ,  to grow  our community   it was needed  to get connected and  provide  services to  kushwaha samaj , we added  matrimonial section in our website to help [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><strong>Kushwaha.in</strong> started in  <strong>2009</strong>  its  almost  7 years  we keep publishing  articles  regarding our history, we keep adding  peoples with years , kushwaha samaj appreciate our  steps ,  to grow  our community   it was needed  to get connected and  provide  services to  kushwaha samaj , we added  <strong>matrimonial section</strong> in our website to help our community members to  find  better match  for their  son or  daughters ,  as community  it was  important step to    let all  gets connected .</p>
<p style="text-align: justify;">We added  <strong> business directory</strong>  to help our community business   peoples to  grow  by sharing  their  business details , for  jobs we  added   <strong>vacancy section</strong> to  help  our new generation to get  job  and   let community grow all round ,  our community  is  full of talents so we added   <strong>Guest writing</strong> section so they can share their  articles to community members .</p>
<p style="text-align: justify;">Join kushwaha.in Today  : <a href="https://kushwaha.in/membership-plan/">Join Now</a></p>
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		<title>राई के कई औषधीय गुण</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Amit]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Nov 2015 07:34:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Health & Fitness]]></category>
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					<description><![CDATA[राई के कई औषधीय गुण है और इसी कारण से इसे कई रोगों को ठीक करने में प्रयोग किया जाता है । कुछ रोगों पर इसका प्रभाव नीचे दिया जा रहा है &#8211; • हृदय की शिथिलता- घबराहत, व्याकुल हृदय में कम्पन अथवा बेदना की स्थिति में हाथ व पैरों पर राई को मलें। ऐसा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">राई के कई औषधीय गुण है और इसी कारण से इसे कई रोगों को ठीक करने में प्रयोग किया जाता है । कुछ रोगों पर इसका प्रभाव नीचे दिया जा रहा है &#8211;</p>
<p style="text-align: justify;">• हृदय की शिथिलता- घबराहत, व्याकुल हृदय में कम्पन अथवा बेदना की स्थिति में हाथ व पैरों पर राई को मलें। ऐसा करने से रक्त परिभ्रमण की गति तीव्र हो जायेगी हृदय की गति मे उत्तेजना आ जायेगी और मानसिक उत्साह भी बढ़ेगा।<br />
• हिचकी आना- 10 ग्राम राई पाव भर जल में उबालें फिर उसे छान ले एवं उसे गुनगुना रहने पर जल को पिलायें।<br />
• बवासीर अर्श- अर्श रोग में कफ प्रधान मस्से हों अर्थात खुजली चलती हो देखने में मोटे हो और स्पर्श करने पर दुख न होकर अच्छा प्रतीत होता हो तो ऐसे मस्सो पर राई का तेल लगाते रहने से मस्से मुरझाने ल्रगते है।<br />
• गंजापन- राई के हिम या फाट से सिर धोते रहने से फिर से बाल उगने आरम्भ हो जाते है।<br />
• मासिक धर्म विकार- मासिक स्त्राव कम होने की स्थिति में टब में भरे गुनगुने गरम जल में पिसी राई मिलाकर रोगिणी को एक घन्टे कमर तक डुबोकर उस टब में बैठाकर हिप बाथ कराये। ऐसा करने से आवश्यक परिमाण में स्त्राव बिना कष्ट के हो जायेगा।<br />
• गर्भाशय वेदना- किसी कारण से कष्ट शूल या दर्द प्रतीत हो रहा हो तो कमर या नाभि के निचें राई की पुल्टिस का प्रयोग बार-बार करना चाहिए।<br />
• सफेद कोढ़ (श्वेत कुष्ठ)- पिसा हुआ राई का आटा 8 गुना गाय के पुराने घी में मिलाकर चकत्ते के उपर कुछ दिनो तक लेप करने से उस स्थान का रक्त तीव्रता से घूमने लगता है। जिससे वे चकत्ते मिटने लगते है। इसी प्रकार दाद पामा आदि पर भी लगाने से लाभ होता है।<br />
• कांच या कांटा लगना- राई को शहद में मिलाकर काच काटा या अन्य किसी धातु कण के लगे स्थान पर लेप करने से वह वह उपर की ओर आ जाता है। और आसानी से बाहर खीचा जा सकता है।<br />
• अंजनी- राई के चूर्ण में घी मिलाकर लगाने से नेत्र के पलको की फुंसी ठीक हो जाती है।<br />
• स्वर बंधता- हिस्टीरिया की बीमारी में बोलने की शक्ति नष्ट हो गयी हो तो कमर या नाभि के नीचे राई की पुल्टिस का प्रयोग बार बार करना चाहिए।<br />
• गर्भ में मरे हुए शिशु को बाहर निकालने के लिए- ऐसी गर्भवती महिला को 3-4 ग्राम राई में थोंड़ी सी पिसी हुई हींग मिलाकर शराब या काजी में मिलाकर पिला देने से शिशु बाहर निकल आयेगा।<br />
• अफरा- राई 2 या 3 ग्राम शक्कर के साथ खिलाकर उपर से चूना मिला पानी पिलाकर और साथ ही उदर पर राई का तेल लगा देने से शीघ्र लाभ हो जाता है।<br />
• विष पान- किसी भी प्रकार से शरीर में विष प्रवेश कर जाये और वमन कराकर विष का प्रभाव कम करना हो तो राई का बारीक पिसा हुआ चूर्ण पानी के साथ देना चाहिए।<br />
• गठिया- राई को पानी में पीसकर गठिया की सूजन पर लगा देने से सूजन समाप्त हो जाती हैं। और गठिया के दर्द में आराम मिलता है।<br />
• हैजा- रोगी व्यक्ति की अत्यधिक वमन दस्त या शिथिलता की स्थिति हो तो राई का लेप करना चाहिए। चाहे वे लक्षण हैजे के हो या वैसे ही हो।<br />
• अजीर्ण- लगभग 5 ग्राम राई पीस लें। फिर उसे जल में घोल लें। इसे पीने से लजीर्ण मंक लाभ होता है।<br />
• मिरगी- राई को पिसकर सूघने से मिरगी जन्य मूच्र्छा समाप्त हो जाती है।<br />
• जुकाम- राई में शुद्ध शहद मिलाकर सूघने व खाने से जुकाम समाप्त हो जाता है।<br />
• कफ ज्वर- जिहृवा पर सफेद मैल की परते जम जाने प्यास व भूख के मंद पड़कर ज्वर आने की स्थिति मे राई के 4-5 ग्राम आटे को शहद में सुबह लेते रहने से कफ के कारण उत्पन्न ज्वर समाप्त हो जाता है।<br />
• घाव में कीड़े पड़ना- यदि घाव मवाद के कारण सड़ गया हो तो उसमें कीड़े पड जाते है। ऐसी दशा में कीड़े निकालकर घी शहद मिली राई का चूर्ण घाव में भर दे। कीड़े मरकर घाव ठीक हो जायेगा।<br />
• दन्त शूल- राई को किंचित् गर्म जल में मिलाकर कुल्ले करने से आराम हो जाता है।<br />
• रसौली, अबुर्द या गांठ- किसी कारण रसौली आदि बढ़ने लगे तो कालीमिर्च व राई मिलाकर पीस लें। इस योग को घी में मिलाकर करने से उसका बढ़ना निश्चित रूप से ठीक हो जाता है।<br />
• विसूचिका- यदि रोग प्रारम्भ होकर अपनी पहेली ही अवस्था में से ही गुजर रहा हो तो राई मीठे के साथ सेवन करना लाभप्रद रहता है।<br />
• उदर शूल व वमन- राई का लेप करने से तुरन्त लाभ होता है।<br />
• उदर कृमि- पेट में कृमि अथवा अन्श्रदा कृमि पड़ जाने पर थोड़ा सा राई का आटा गोमूत्र के साथ लेने से कीड़े समाप्त हो जाते है। और भविष्य में उत्पन्न नही होते।</p>
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		<title>मोटापा भगाने. आंखो के विकार दूर करने, चुस्त दुरूस्त, स्वस्थय रहने, कई बीमारिया दूर करने का सबसे अच्छा तरीका</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Amit]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Nov 2015 07:33:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Health & Fitness]]></category>
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					<description><![CDATA[आज के समय में व्यक्ति अपने खान-पान और अनियमित जीवनशैली के कारण अपनेआप पर ध्यान नहीं दे पाता, नतीजन वह कई बीमारियों का शिकार हो जाता है और इन बीमारियों में कब्ज, थकान होना, नींद न आना इत्यादि है। इनके इलाज के लिए व्यक्ति दवाईयों का लगातार सेवन करता रहता है, जिससे वह कई और [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">आज के समय में व्यक्ति अपने खान-पान और अनियमित जीवनशैली के कारण अपनेआप पर ध्यान नहीं दे पाता, नतीजन वह कई बीमारियों का शिकार हो जाता है और इन बीमारियों में कब्ज, थकान होना, नींद न आना इत्यादि है। इनके इलाज के लिए व्यक्ति दवाईयों का लगातार सेवन करता रहता है, जिससे वह कई और बीमारियों का शिकार हो जाते है। लेकिन यदि हम थोड़ी सी सावधानी बरतकर और आयुर्वेद को अपनाए तो अपने स्वाहस्य्ले की सही तरह से देखभाल कर ही पाएंगे साथ ही शरीर का कायाकल्प भी करने में आसानी होगी। त्रि&#x200d;फला ऐसी ही आयुर्वेदिक औषधी है जो शरीर का कायाकल्प कर सकती है। त्रि&#x200d;फला के सेवन से बहुत फायदें हैं। स्वस्थ&#x200d; रहने के लिए त्रि&#x200d;फला चूर्ण महत्वपूर्ण है। त्रि&#x200d;फला सिर्फ कब्ज दूर करने ही नहीं बल्कि कमजोर शरीर को एनर्जी देने में भी प्रयोग हो सकता है। बस जरुरत है तो इसके नियमित सेवन करने की |</p>
<p style="text-align: justify;">सेवन विधि &#8211; सुबह हाथ मुंह धोने व कुल्ला आदि करने के बाद खाली पेट ताजे पानी के साथ इसका सेवन करें तथा सेवन के बाद एक घंटे तक पानी के अलावा कुछ ना लें | इस नियम का कठोरता से पालन करें |</p>
<p style="text-align: justify;">यह तो हुई साधारण विधि पर आप कायाकल्प के लिए नियमित इसका इस्तेमाल कर रहे है तो इसे विभिन्न ऋतुओं के अनुसार इसके साथ गुड़, सैंधा नमक आदि विभिन्न वस्तुएं मिलाकर ले | हमारे यहाँ वर्ष भर में छ: ऋतुएँ होती है और प्रत्येक ऋतू में दो दो मास |</p>
<p style="text-align: justify;">१- ग्रीष्म ऋतू &#8211; १४ मई से १३ जुलाई तक त्रिफला को गुड़ १/४ भाग मिलाकर सेवन करें |</p>
<p style="text-align: justify;">२- वर्षा ऋतू &#8211; १४ जुलाई से १३ सितम्बर तक इस त्रिदोषनाशक चूर्ण के साथ सैंधा नमक १/४ भाग मिलाकर सेवन करें |</p>
<p style="text-align: justify;">३- शरद ऋतू &#8211; १४ सितम्बर से १३ नवम्बर तक त्रिफला के साथ देशी खांड १/४ भाग मिलाकर सेवन करें |</p>
<p style="text-align: justify;">४- हेमंत ऋतू &#8211; १४ नवम्बर से १३ जनवरी के बीच त्रिफला के साथ सौंठ का चूर्ण १/४ भाग मिलाकर सेवन करें |</p>
<p style="text-align: justify;">५- शिशिर ऋतू &#8211; १४ जनवरी से १३ मार्च के बीच पीपल छोटी का चूर्ण १/४ भाग मिलाकर सेवन करें |</p>
<p style="text-align: justify;">६- बसंत ऋतू &#8211; १४ मार्च से १३ मई के दौरान इस के साथ शहद मिलाकर सेवन करें | शहद उतना मिलाएं जितना मिलाने से अवलेह बन जाये |</p>
<p style="text-align: justify;">इस तरह इसका सेवन करने से एक वर्ष के भीतर शरीर की सुस्ती दूर होगी , दो वर्ष सेवन से सभी रोगों का नाश होगा , तीसरे वर्ष तक सेवन से नेत्रों की ज्योति बढ़ेगी, चार वर्ष तक सेवन से चेहरे का सोंदर्य निखरेगा , पांच वर्ष तक सेवन के बाद बुद्धि का अभूतपूर्व विकास होगा,छ: वर्ष सेवन के बाद बल बढेगा, सातवें वर्ष में सफ़ेद बाल काले होने शुरू हो जायेंगे और आठ वर्ष सेवन के बाद शरीर युवाशक्ति सा परिपूर्ण लगेगा |</p>
<p style="text-align: justify;">दो तोला हरड बड़ी मंगावे |तासू दुगुन बहेड़ा लावे ||<br />
और चतुर्गुण मेरे मीता |ले आंवला परम पुनीता ||<br />
कूट छान या विधि खाय|ताके रोग सर्व कट जाय ||</p>
<p style="text-align: justify;">त्रिफला का अनुपात होना चाहिए :- 1:2:3=1(हरड )+2(बहेड़ा )+3(आंवला )<br />
मतलब जैसे आपको 100 ग्राम त्रिफ़ला बनाना है तो :: 20 ग्राम हरड+40 ग्राम बहेडा+60 ग्राम आंवला<br />
अगर साबुत मिले तो तीनो को पीस लेना और अगर चूर्ण मिल जाए तो मिला लेना</p>
<p style="text-align: justify;">त्रिफला लेने का सही नियम &#8211;</p>
<p style="text-align: justify;">*सुबह अगर हम त्रिफला लेते हैं तो उसको हम &#8220;पोषक &#8221; कहते हैं |क्योंकि सुबह त्रिफला लेने से त्रिफला शरीर को पोषण देता है जैसे शरीर में vitamine, iron, calcium, micronutrients की कमी को पूरा करता है एक स्वस्थ व्यक्ति को सुबह त्रिफला खाना चाहिए |</p>
<p style="text-align: justify;">*सुबह जो त्रिफला खाएं हमेशा गुड के साथ खाएं |</p>
<p style="text-align: justify;">*रात में जब त्रिफला लेते हैं उसे &#8220;रेचक &#8221; कहते है क्योंकि रात में त्रिफला लेने से पेट की सफाई (कब्ज इत्यादि )का निवारण होता है |</p>
<p style="text-align: justify;">*रात में त्रिफला हमेशा गर्म दूध के साथ लेना चाहिए |</p>
<p style="text-align: justify;">नेत्र-प्रक्षलन : एक चम्मच त्रिफला चूर्ण रात को एक कटोरी पानी में भिगोकर रखें। सुबह कपड़े से छानकर उस पानी से आंखें धो लें। यह प्रयोग आंखों के लिए अत्यंत हितकर है। इससे आंखें स्वच्छ व दृष्टि सूक्ष्म होती है। आंखों की जलन, लालिमा आदि तकलीफें दूर होती हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">&#8211; कुल्ला करना : त्रिफला रात को पानी में भिगोकर रखें। सुबह मंजन करने के बाद यह पानी मुंह में भरकर रखें। थोड़ी देर बाद निकाल दें। इससे दांत व मसूड़े वृद्धावस्था तक मजबूत रहते हैं। इससे अरुचि, मुख की दुर्गंध व मुंह के छाले नष्ट होते हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">&#8211; त्रिफला के गुनगुने काढ़े में शहद मिलाकर पीने से मोटापा कम होता है। त्रिफला के काढ़े से घाव धोने से एलोपैथिक- एंटिसेप्टिक की आवश्यकता नहीं रहती। घाव जल्दी भर जाता है।</p>
<p style="text-align: justify;">&#8211; गाय का घी व शहद के मिश्रण (घी अधिक व शहद कम) के साथ त्रिफला चूर्ण का सेवन आंखों के लिए वरदान स्वरूप है।</p>
<p style="text-align: justify;">&#8211; संयमित आहार-विहार के साथ इसका नियमित प्रयोग करने से मोतियाबिंद, कांचबिंदु-दृष्टिदोष आदि नेत्र रोग होने की संभावना नहीं होती।</p>
<p style="text-align: justify;">&#8211; मूत्र संबंधी सभी विकारों व मधुमेह में यह फायदेमंद है। रात को गुनगुने पानी के साथ त्रिफला लेने से कब्ज नहीं रहती है।</p>
<p style="text-align: justify;">&#8211; मात्रा : 2 से 4 ग्राम चूर्ण दोपहर को भोजन के बाद अथवा रात को गुनगुने पानी के साथ लें।</p>
<p style="text-align: justify;">&#8211; त्रिफला का सेवन रेडियोधर्मिता से भी बचाव करता है। प्रयोगों में देखा गया है कि त्रिफला की खुराकों से गामा किरणों के रेडिएशन के प्रभाव से होने वाली अस्वस्थता के लक्षण भी नहीं पाए जाते हैं। इसीलिए त्रिफला चूर्ण आयुर्वेद का अनमोल उपहार कहा जाता है।</p>
<p style="text-align: justify;">सावधानी : दुर्बल, कृश व्यक्ति तथा गर्भवती स्त्री को एवं नए बुखार में त्रिफला का सेवन नहीं करना चाहिए।</p>
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		<title>प्रतिदिन नाक में २ -२ बूँद गाय के घी या तिल या सरसों के तेल की डालना हमें बहुत सारे लाभ देता</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Amit]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Nov 2015 07:32:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Health & Fitness]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रतिदिन नाक में २ -२ बूँद गाय के घी या तिल या सरसों के तेल की डालना हमें बहुत सारे लाभ देता है .तेल या घी को लेट कर नाक में डाले और हल्का सा खिंच ले . 5 मिण्ट लेते रहे .इसे प्रतिमर्श नस्य कहा जाता है .आयुर्वेद में इसे लेने के १४ समय [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">प्रतिदिन नाक में २ -२ बूँद गाय के घी या तिल या सरसों के तेल की डालना हमें बहुत सारे लाभ देता है .तेल या घी को लेट कर नाक में डाले और हल्का सा खिंच ले . 5 मिण्ट लेते रहे .इसे प्रतिमर्श नस्य कहा जाता है .आयुर्वेद में इसे लेने के १४ समय बताये गए है -सुबह उठने पर ,दंत धावन, व्यायाम, शरीरसंबंध, मलमूत्र त्याग, भोजन ,वमन , के बाद दिन में सो के उठने पर ,और शाम को . बाहर जाते समय नस्य लेने से प्रदुषण का असर नहीं होगा .<br />
&#8211; रात में सोते समय नस्य लेने से वात रोगों में लाभ मिलता है ; विशेष<span class="text_exposed_show">कर तब जब हम तेज़ पंखे या एसी में सोये .<br />
&#8211; थायरोइड<br />
-स्मरण शक्ति ; इसलिए विद्यार्थियों के लिए लाभकारी<br />
-बाल झडना और असमय सफ़ेद होना<br />
-दांत के रोगों में जैसे दर्द ,सेंसिटिविटी , मसूड़ों की समस्या<br />
&#8211; बेहतर केल्शियम एब्ज़ोर्प्शन<br />
&#8211; लम्बाई बढाता है<br />
&#8211; नाक की समस्याएँ पोलिप्स , छींकें आना , नाक बंद होना , सर्दी ज़ुकाम<br />
&#8211; गला खराब होने पर<br />
&#8211; कान की समस्याएँ<br />
&#8211; स्नायु शिथिलता<br />
&#8211; स्टेमिना बढाता है .<br />
&#8211; अच्छी नींद<br />
&#8211; सिरदर्द<br />
&#8211; मानसिक तनाव<br />
&#8211; नाक के माध्यम से दी गई दवाई का डेढ़ मिं में असर होता है . ये ब्रेन पर तुरंत असर करता है क्योंकि यहाँ ब्लड ब्रेन बेरियर नहीं होता .नाक ही ब्रेन का प्रवेश द्वार है .<br />
&#8211; हिमोग्लोबिन बढ़ता है .<br />
&#8211; रोगप्रतिरोधक शक्ति बढती है .<br />
&#8211; हकलाहट में लाभ<br />
&#8211; होर्मोनल असंतुलन को ठीक करता है .<br />
&#8211; फेशियल पेरेलिसिस<br />
&#8211; आँख फड़कना<br />
&#8211; चोट जल्द भरना<br />
&#8211; विद्यार्थियों में दिमागी शक्ति बढाने के लिए केसर, ज्येष्ठी मधु ,अश्वगंधा ,ब्राम्ही ,शंखपुष्पी , शतावरी जैसी दवाइयों का अर्क अगर गाय के घी से दिया जाए तो कान और आँखों की शक्ति बढती है ; दिमाग की ग्राह्य क्षमता बढती है<br />
&#8211; एक शोध में वेखंड ,जटामासी ,वाला आदि जड़ी बूटी युक्त अगरबत्ती जब रात्री में जलाई गयी तो स्मरण शक्ति में सुधार देखा गया .<br />
&#8211; गर्दन में दर्द<br />
&#8211; टोंसिल्स<br />
&#8211; .कुछ विशेष परिस्थितियों में जैसे स्म्रुतिनाश या फिट्स के लिए वैद्य की सलाह से नस्य ले .<br />
&#8211; नस्य ना लेने का समय &#8212;- वर्षा ऋतू में जब सूर्य ना हो ; गर्भवती या प्रसव के बाद ;बाल धोने के बाद ; भूक या प्यास लगने पर , बीमार पड़ने पर ;अजीर्ण होने पर ; आघात होने पर या बहुत थका हुआ होने पर ; अनुवासन बस्ती या विरेचन के बाद .</span></p>
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		<title>मुल्तानी मिट्टी के दमदार प्रयोग : इन्हें आजमाएं चेहरा चमकने लगेगा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Amit]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Nov 2015 07:30:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Health & Fitness]]></category>
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					<description><![CDATA[फेस को ग्लोइंग और ऑइल फ्री बनाने के लिए घरेलू फेसपैक व स्क्रब से अच्छा कोई दूसरा उपाय नहीं है। मुल्तानी मिट्टी वाले फेसपैक को सबसे असरदार माना जाता है। कहा जाता है कि मुल्तानी मिट्टी सौन्दर्य का खजाना है। ये नेचुरल कंडीशनर भी है और ब्लीच भी। ये सौन्दर्य निखारने का सबसे सस्ता और [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">फेस को ग्लोइंग और ऑइल फ्री बनाने के लिए घरेलू फेसपैक व स्क्रब से अच्छा कोई दूसरा उपाय नहीं है। मुल्तानी मिट्टी वाले फेसपैक को सबसे असरदार माना जाता है।<br />
कहा जाता है कि मुल्तानी मिट्टी सौन्दर्य का खजाना है। ये नेचुरल कंडीशनर भी है और ब्लीच भी। ये सौन्दर्य निखारने का सबसे सस्ता और आयुर्वेदिक नुस्खा है।</p>
<div class="text_exposed_show">
<p style="text-align: justify;">ऑयली त्वचा के लिए&#8211; ऑयली त्वचा के लिए मुल्तानी मिट्टी में दही और पुदीने की पत्तियों का पाउडर मिला कर उसे आधे घंटे तक रखा रहने दें, फिर अच्छे से मिलाकर चेहरे और गर्दन पर लगाएं।<br />
सूखने पर गुनगुने पानी से धो दें। ये ऑयली त्वचा को चिकनाई रहित रखने का कारगर नुस्खा है।</p>
<p style="text-align: justify;">काजू से करें स्क्रबिंग&#8211; काजू को स्किन के लिए बहुत अच्छा होता है। काजू को दूध में भिगोकर उसे पीसकर चेहरे पर लगाना अच्छा होता है।<br />
लेकिन चेहरे से गंदगी हटाना और स्किन ड्राय हो तो अगर आपकी त्वचा ड्राई है तो काजू को रात भर दूध में भिगो दें और सुबह बारीक पीसकर इसमें मुल्तानी मिट्टी और शहद की कुछ बूंदें मिलाकर स्क्रब करें।</p>
<p style="text-align: justify;">मुहांसों को ऐसे करें दूर- यंग एज में मुंहासे एक आम समस्या होती है। मुहांसों से परेशान युवाओं के लिए मुल्तानी मिट्टी का फेसपेक बहुत अच्छा होता है क्योंकि ये स्किन पर आने वाले एक्स्ट्रा ऑइल को सोख लेती है और स्किन को मुलायम बना देती है।</p>
<p style="text-align: justify;">मुंहासों की समस्या से परेशान लोगों के लिए तो मुल्तानी मिट्टी सबसे कारगर इलाज है, क्योंकि मुल्तानी मिट्टी चेहरे का तेल सोख लेती है जिससे मुंहासे सूख जाते हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">आरेंज से स्मूथ बनाए स्किन- आधा चम्मच संतरे का रस लेकर उसमें 4-5 बूंद नींबू का रस, आधा चम्मच मुल्तानी मिट्टी, आधा चम्मच चंदन पाउडर और कुछ बूंदें गुलाब जल की मिलाकर कर थोड़ी देर के लिए फ्रिज में रख दें।<br />
फिर इसे लगा कर 15-20 मिनट तक रखें। इसके बाद पानी से इसे धो दें। यह ऑयली त्वचा का सबसे अच्छा उपाय है।</p>
</div>
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		<title>दवा है हल्दी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Amit]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Nov 2015 07:29:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Health & Fitness]]></category>
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					<description><![CDATA[गले में किनती भी ख़राब से ख़राब बीमारी हो, कोई भी इन्फेक्शन हो, इसकी सबसे अच्छी दवा है हल्दी । जैसे गले में दर्द है, खरास है , गले में खासी है, गले में कफ जमा है, गले में टोनसीलाईटिस हो गया ; ये सब बिमारिओं में आधा चम्मच कच्ची हल्दी का रस लेना और [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">गले में किनती भी ख़राब से ख़राब बीमारी हो, कोई भी इन्फेक्शन हो, इसकी सबसे अच्छी दवा है हल्दी । जैसे गले में दर्द है, खरास है , गले में खासी है, गले में कफ जमा है, गले में टोनसीलाईटिस हो गया ; ये सब बिमारिओं में आधा चम्मच कच्ची हल्दी का रस लेना और मुह खोल कर गले में डाल देना , और फिर थोड़ी देर चुप होके बैठ जाना तो ये हल्दी गले में निचे उतर जाएगी लार के साथ ; और एक खुराक में ही सब बीमारी ठीक होगी दुबारा डालने की जरुरत नही । ये छोटे बच्चो को तो जरुर करना ; बच्चो के टोन्सिल जब बह<span class="text_exposed_show">ुत तकलीफ देते है न तो हम ऑपरेशन करवाके उनको कटवाते है ; वो करने की जरुरत नही है हल्दी से सब ठीक होता है ।<br />
गले और छाती से जुडी हुई कुछ बीमारिया है जैसे खासी ; इसका एक इलाज तो कच्ची हल्दी का रस है जो गले में डालने से तुरन्त ठीक हो जाती है चाहे कितनी भी जोर की खासी हो ।<br />
दूसरी दवा है अदरक , ये जो अदरक है इसका छोटा सा टुकड़ा मुह में रख लो और ट़ाफी की तरह चुसो खासी तुरन्त बंद हो जाएगी । अगर किसी को खासते खासते चेहरा लाल पड़ गया हो तो अदरक का रस ले लो और उसमे थोड़ा पान का रस मिला लो दोनों एक एक चम्मच और उसमे मिलाना थोड़ा सा गुड या सेहद । अब इसको थोडा गरम करके पी लेना तो जिसको खासते खासते चेहरा लाल पड़ा है उसकी खासी एक मिनट में बंध हो जाएगी ।<br />
और एक अच्छी दवा है , अनार का रस गरम करके पियो तो खासी तुरन्त ठीक होती है । काली मिर्च है गोल मिर्च इसको मुह में रख के चबालो , पीछे से गरम पानी पी लो तो खासी बंध हो जाएगी, काली मिर्च को चुसो तो भी खासी बंध हो जाती है ।<br />
छाती की कुछ बिमारिया जैसे दमा, अस्थमा, ब्रोंकिओल अस्थमा, इन तीनो बीमारी का सबसे अच्छा दवा है गाय मूत्र ; आधा कप गोमूत्र पियो सबेरे का ताजा ताजा तो दमा ठीक होता है, अस्थमा ठीक होता है, ब्रोंकिओल अस्थमा ठीक होता है । और गोमूत्र पिने से टीबी भी ठीक हो जाता है , लगातार पांच छे महीने पीना पड़ता है । दमा अस्थमा काऔर एक अछि दावा है दालचीनी, इसका पाउडर रोज सुबह आधे चम्मच खाली पेट गुड या सेहद मिलाके गरम पानी के साथ लेने से दमा अस्थमा ठीक कर देती है ।</span></p>
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		<title>सर्दियों में बनाये सेहत &#8211;कुछ उपयोगी तरीके सेहत के नुस्खे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Amit]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Nov 2015 07:28:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Health & Fitness]]></category>
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					<description><![CDATA[इन सर्दियों में यदि आप अपनी सेहत बनाने की सोच रहे हैं तो सबसे पहले पेट साफ करने की जरूरत है। पेट में कब्ज रहेगा तो कितने ही पौष्टिक पदार्थों का सेवन करें, लाभ नहीं होगा। भोजन समय पर तथा चबा-चबाकर खाना चाहिए, ताकि पाचन शक्ति ठीक बनी रहे, फिर पौष्टिक आहार या औषधि का [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>इन सर्दियों में यदि आप अपनी सेहत बनाने की सोच रहे हैं तो सबसे पहले पेट साफ करने की जरूरत है। पेट में कब्ज रहेगा तो कितने ही पौष्टिक पदार्थों का सेवन करें, लाभ नहीं होगा। भोजन समय पर तथा चबा-चबाकर खाना चाहिए, ताकि पाचन शक्ति ठीक बनी रहे, फिर पौष्टिक आहार या औषधि का सेवन करना चाहिए।</p>
<p>आचार्य चरक ने कहा है कि पुरुष के शरीर में वीर्य तथा स्त्र<span class="text_exposed_show"><br />
ी के शरीर में ओज होना चाहिए, तभी चेहरे पर चमक व कांति नजर आती है और शरीर पुष्ट<br />
दिखता है।हम यहाँ कुछ ऐसे पौष्टिक पदार्थों की जानकारी दे रहे हैं, जिन्हें किशोरावस्था से लेकर युवावस्था तक के लोग सेवन कर लाभ उठा सकते हैं और बलवान बन सकते हैं-<br />
* सोते समय एक गिलास मीठे गुनगुने गर्म दूध में एक चम्मच शुद्ध घी डालकर पीना चाहिए।<br />
* दूध की मलाई तथा पिसी मिश्री जरूरत के अनुसार मिलाकर खाना चाहिए, यह अत्यंत शक्तिवर्द्धक है।<br />
* एक बादाम को पत्थर पर घिसकर दूध में मिलाकर पीना चाहिए, इससे अपार बल मिलता है। बादाम को घिसकर ही उपयोग में लें।<br />
* छाछ से निकाला गया ताजा माखन तथा मिश्री मिलाकर खाना चाहिए, ऊपर से पानी बिलकुल न पिएँ।<br />
* 50 ग्राम उड़द की दाल आधा लीटर दूध में पकाकर खीर बनाकर खाने से अपार बल प्राप्त होता है। यह खीर पूरे शरीर को पुष्ट करती है।<br />
* प्रातः एक पाव दूध तथा दो-तीन केले साथ में खाने से बल मिलता है, कांति बढ़ती है।<br />
* एक चम्मच असगंध चूर्ण तथा एक चम्मच मिश्री मिलाकर गुनगुने एक पाव दूर के साथ प्रातः व रात को सेवन करें, रात को सेवन के बाद कुल्ला कर सो जाएँ। 40 दिन में परिवर्तन नजर आने लगेगा।<br />
* सफेद मूसली या धोली मूसली का पावडर, जो स्वयं कूटकर बनाया हो, एक चम्मच तथा पिसी मिश्री एक चम्मच लेकर सुबह व रात को सोने से पहले गुनगुने एक पाव दूध के साथ लें। यह अत्यंत शक्तिवर्धक है।<br />
* सुबह-शाम भोजन के बाद सेवफल, अनार, केले या जो भी मौसमी फल हों, खाएँ।<br />
* सुबह एक पाव ठंडे दूध में एक बड़ा चम्मच शहद मिलाकर पीने से खून साफ होता है, शरीर में खून की वृद्धि होती है।<br />
* प्याज का रस 2 चम्मच, शहद 1 चम्मच, घी चौथाई चम्मच मिलाकर सेवन करें और स्वयं शक्ति का चमत्कार देखें। यह नुस्खा यौन शक्ति बढ़ाने में अचूक है। ऊपर वर्णित नुस्खे स्त्री-पुरुष दोनों के लिए समान हैं। इन्हें अनुकूल मात्रा में उचित विधि से सुबह-रात को सेवन सेवन करना चाहिए।</span></p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>तुलसी (Tulsi)</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Amit]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Nov 2015 07:20:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Health & Fitness]]></category>
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					<description><![CDATA[तुलसी का पौधा यूं ही हर घर-आंगन की शोभा नहीं बनता। घरों तथा मंदिरों में तो इसका पौधा अनिवार्य माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से तो इसकी उपयोगिता है ही, स्वास्थ्य रक्षक के रूप में भी यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आज के जमाने में घरों में मनीप्लांट या अन्य सुन्दर सजावटी पौधे लगाये जाते [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">तुलसी का पौधा यूं ही हर घर-आंगन की शोभा नहीं बनता। घरों तथा मंदिरों में तो इसका पौधा अनिवार्य माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से तो इसकी उपयोगिता है ही, स्वास्थ्य रक्षक के रूप में भी यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।</p>
<p style="text-align: justify;">आज के जमाने में घरों में मनीप्लांट या अन्य सुन्दर सजावटी पौधे लगाये जाते हैं, वहीं तुलसी का पौधा भी जरूर नजर आता है। दरअसल, हम सभी जानते हैं कि तुलसी का पौधा लगा कर कई बीमारियों से बचा जा सकता है। इसके रख-रखाव में भी विशेष परिश्रम नहीं करनी पड़ती। इसके पौधे के पास जाने से इससे स्पर्श हुई हवा से ही कई परेशानियां दूर हो जाती हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">स्पर्श और गंध में जादू<br />
इसकी गंध युक्त हवा जहां-जहां जाती है, वहां का वायुमण्डल शुद्ध हो जाता है। इसे दूषित पानी एवं गंदगी से बचाना जरूरी होता है। धार्मिक दृष्टि से तुलसी पर पानी चढ़ाना नित्य नेम का हिस्सा माना जाता है। विद्वानों का मत है कि जल चढ़ाते समय इसका स्पर्श और गंध रोग पैदा करने वाले जीवाणुओं को नष्ट करने में सक्षम है। वैसे तो इसकी कई जातियां हैं, लेकिन श्वेत और श्याम या रामा तुलसी और श्यामा तुलसी ही प्रमुख हैं। पहचान के लिए श्वेत के पत्ते तथा शाखाएं श्वेताय (हल्की सफेदी) तथा कृष्णा के कृष्णाय (हल्का कालापन) लिये होते हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">काले पत्ते वाली तुलसी<br />
कुछ विज्ञान काले पत्ते वाली तुलसी को औषधीय गुणों में उत्तम मानते हैं तो कुछ दोनों को ही सामान्य गुण वाली मानते हैं। इसके पत्ते मूल, बीज, जड़ तथा इसकी लकड़ी सभी उपयोगी होती है। इसके पत्तों की रस की मात्र बड़ों के लिए दो तोला (लगभग तीन चम्मच) तथा बीजों का चूर्ण एक से दो ग्राम की मात्रा में लिया जाता है।</p>
<p style="text-align: justify;">औषधीय गुणों में यह हृदय को बल देने वाली, भूख बढ़ाने वाली, वायु, कफ, खांसी-हिचकी, उल्टी, कुष्ठ (कोढ़), रक्त विकार, अपस्भार हिस्टीरीया और सभी प्रकार के बुखारों में उपयोगी है।</p>
<p style="text-align: justify;">जीवाणुओं को नष्ट करता है<br />
तुलसी में एक उड़नशील तेल होता है, जो हवा में मिलकर मलेरिया बुखार फैलाने वाले जीवाणुओं को नष्ट करता है। विद्वानों का मत है कि तुलसी के पत्तों के दो तोले रस में तीन माशे काली मिर्च का चूर्ण मिला कर पीने से मलेरिया में बहुत लाभ होता है।</p>
<p style="text-align: justify;">और भी हैं औषधीय गुण<br />
इसके पत्ते चाय के साथ या अनाज उबाल कर पिलाने से छाती की सर्दी में लाभ होता है। सर्दी के कारण जमा कफ बाहर निकल जाता है जिससे छाती के दर्द में आराम मिलता है।</p>
<p style="text-align: justify;">बढ़े हुए कफ में इस का रस शहद में मिलाकर देना लाभकारी है। पुराने बुखार में इसके पत्तों का रस सारे शरीर पर मलने से लाभ होता है। आंतों में छिपे कीड़ों के लिये पत्तों का चूर्ण सेवन करना हितकर है। उल्टी में इसके पत्तों का रस और अदरख का रस मिला कर पिलाने से लाभ होता है। पेट साफ होता है।</p>
<p style="text-align: justify;">दाद हो तो इसका रस लगाने से फायदा होता है। पुराना घाव हो तो इसके रस से घाव धोने से संक्रमण नहीं होता, उसमें कीड़े नहीं पड़ते, दुगर्न्ध दूर होती है। घाव भरता है।</p>
<p style="text-align: justify;">इसका पाचांग फल-फूल पत्ते तना जड़ का चूर्ण बना कर नीबू के रस में घोल कर लगाने से दाद खाज एक्जिमा एवं अन्य चर्म रोगों में लाभकारी है।</p>
<p style="text-align: justify;">शरीर के सफेद दाग, मुंह पर कील-मुहांसे, झाई पर इसका रस लगाना लाभकारी है। सांप काटे व्यक्ति को एक से दो मुट्ठी तुलसी के पत्ते चबवा दिये जाएं तो सांप का जहर मिट जाएगा। पत्ते खिलाने के साथ इसकी जड़ का चूर्ण मक्खन में मिला सांप काटी जगह पर लेप करना हितकर है। इसकी पहचान यह है कि लेप करते समय इसका रंग सफेद होगा लेकिन जैसे-जैसे जहर इस लेप से कम होगा, लेप का रंग काला होता जाएगा। तभी तुरन्त उस लेप को हटा दूसरा लेप लगा देना चाहिये। जब तक लेप का रंग काला होना बंद हो जाए तो समझना चाहिये ये जहर का असर खत्म हो गया।</p>
<p style="text-align: justify;">बिच्छू या ततैया, बर्र आदि के डंक मारने पर तुलसी का रस लगाने से और पिलाने से दर्द दूर होता है।</p>
<p style="text-align: justify;">खांसी, श्वास में तुलसी के पत्तों का रस वासा के पत्तों का रस एक से दो चम्मच मिला कर पीने से लाभ होता है। बल पौरुष बढ़ाने, शरीर को बलवान बनाने में तुलसी बीज का चूर्ण चमत्कारी है। यह बलवर्धक, शीघ्र पतन व नपुंसकता नाशक और पौष्टिक होता है। इसके सेवन से असमय वृद्धा अवस्था नहीं आती, शरीर बलवान चेहरा कान्तिमान होता है।</p>
<p style="text-align: justify;">बच्चों के लिवर की कमजोरी में इसका काढ़ा पिलाना बहुत लाभकारी है। कान के दर्द में इसके पत्तों का रस गर्म कर कान में टपकाने से दर्द में चैन मिलता है।</p>
<p style="text-align: justify;">इसकी मंजरी (फूल) सौंठ, प्याज रस और शहद मिलाकर चाटने से सूखी खांसी और दमा में लाभ होता है। इसे पत्तों का चूर्ण या मंजरी का चूर्ण सूंघने से जुकाम (सायनोसायटिस) नाक की दुर्गन्ध दूर होती है तथा मस्तक के कीड़े नष्ट होते हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">दांत दर्द में तुलसी के पत्ते तथा काली मिर्च साथ पीस कर गोली बना कर खाने से लाभ होता है। तुलसी के पत्ते और जीरा मिलाकर पीस कर शहद से लेने से मरोड़ और दस्त में लाभ होता है।</p>
]]></content:encoded>
					
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		<item>
		<title>किस रोग में कौन सा रस लेंगे?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Amit]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Nov 2015 07:18:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Health & Fitness]]></category>
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					<description><![CDATA[भूख लगाने के हेतुः प्रातःकाल खाली पेट नींबू का पानी पियें। खाने से पहले अदरक का कचूमर सैंधव नमक के साथ लें। रक्तशुद्धिः नींबू, गाजर, गोभी, चुकन्दर, पालक, सेव, तुलसी, नीम और बेल के पत्तों का रस। दमाः लहसुन, अदरक, तुलसी, चुकन्दर, गोभी, गाजर, मीठी द्राक्ष का रस, भाजी का सूप अथवा मूँग का सूप [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">भूख लगाने के हेतुः प्रातःकाल खाली पेट नींबू का पानी पियें। खाने से पहले अदरक का कचूमर सैंधव नमक के साथ लें।</p>
<p style="text-align: justify;">रक्तशुद्धिः नींबू, गाजर, गोभी, चुकन्दर, पालक, सेव, तुलसी, नीम और बेल के पत्तों का रस।</p>
<p style="text-align: justify;">दमाः लहसुन, अदरक, तुलसी, चुकन्दर, गोभी, गाजर, मीठी द्राक्ष का रस, भाजी का सूप अथवा मूँग का सूप और बकरी का शुद्ध दूध लाभदायक है। घी, तेल, मक्खन वर्जित है।</p>
<p style="text-align: justify;">उच्च रक्तचापः गाजर, अंगूर, मोसम्मी और ज्वारों का रस। मानसिक तथा शारीरिक आराम आवश्यक है।</p>
<p style="text-align: justify;">निम्न रक्तचापः मीठे फलों का रस लें, किन्तु खट्टे फलों का उपयोग न करें। अंगूर और मोसम्मी का रस अथवा दूध भी लाभदायक है।</p>
<p style="text-align: justify;">पीलियाः अंगूर, सेव, रसभरी, मोसम्मी। अंगूर की अनुपलब्धि पर लाल मुनक्के तथा किसमिस का पानी। गन्ने को चूसकर उसका रस पियें। केले में 1.5 ग्राम चूना लगाकर कुछ समय रखकर फिर खायें।</p>
<p style="text-align: justify;">मुहाँसों के दागः गाजर, तरबूज, प्याज, तुलसी और पालक का रस।</p>
<p style="text-align: justify;">संधिवातः लहसुन, अदरक, गाजर, पालक, ककड़ी, गोभी, हरा धनिया, नारियल का पानी तथा सेव और गेहूँ के ज्वारे।</p>
<p style="text-align: justify;">एसीडिटीः गाजर, पालक, ककड़ी, तुलसी का रस, फलों का रस अधिक लें। अंगूर मोसम्मी तथा दूध भी लाभदायक है।</p>
<p style="text-align: justify;">कैंसरः गेहूँ के ज्वारे, गाजर और अंगूर का रस।</p>
<p style="text-align: justify;">सुन्दर बनने के लिएः सुबह-दोपहर नारियल का पानी या बबूल का रस लें। नारियल के पानी से चेहरा साफ करें।</p>
<p style="text-align: justify;">फोड़े-फुन्सियाँ- गाजर, पालक, ककड़ी, गोभी और नारियल का रस।</p>
<p style="text-align: justify;">कोलाइटिसः गाजर, पालक और पाइनेपल का रस। 70 प्रतिशत गाजर के रस के साथ अन्य रस समप्राण। चुकन्दर, नारियल, ककड़ी, गोभी के रस का मिश्रण भी उपयोगी है।</p>
<p style="text-align: justify;">अल्सरः अंगूर, गाजर, गोभी का रस। केवल दुग्धाहार पर रहना आवश्यक है।<br />
सर्दी-कफः मूली, अदरक, लहसुन, तुलसी, गाजर का रस, मूँग अथवा भाजी का सूप।</p>
<p style="text-align: justify;">ब्रोन्काइटिसः पपीता, गाजर, अदरक, तुलसी, पाइनेपल का रस, मूँग का सूप। स्टार्चवाली खुराक वर्जित।</p>
<p style="text-align: justify;">दाँत निकलते बच्चे के लिएः पाइनेपल का रस थोड़ा नींबू डालकर रोज चार औंस(100-125 ग्राम)।</p>
<p style="text-align: justify;">रक्तवृद्धि के लिएः मोसम्मी, अंगूर, पालक, टमाटर, चुकन्दर, सेव, रसभरी का रस रात को। रात को भिगोया हुआ खजूर का पानी सुबह में। इलायची के साथ केले भी उपयोगी हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">स्त्रियों को मासिक धर्म कष्टः अंगूर, पाइनेपल तथा रसभरी का रस।</p>
<p style="text-align: justify;">आँखों के तेज के लिएः गाजर का रस तथा हरे धनिया का रस श्रेष्ठ है।</p>
<p style="text-align: justify;">अनिद्राः अंगूर और सेव का रस। पीपरामूल शहद के साथ।</p>
<p style="text-align: justify;">वजन बढ़ाने के लिएः पालक, गाजर, चुकन्दर, नारियल और गोभी के रस का मिश्रण, दूध, दही, सूखा मेवा, अंगूर और सेवों का रस।</p>
<p style="text-align: justify;">डायबिटीजः गोभी, गाजर, नारियल, करेला और पालक का रस।</p>
<p style="text-align: justify;">पथरीः पत्तों वाली भाजी न लें। ककड़ी का रस श्रेष्ठ है। सेव अथवा गाजर या कद्दू का रस भी सहायक है। जौ एवं सहजने का सूप भी लाभदायक है।</p>
<p style="text-align: justify;">सिरदर्दः ककड़ी, चुकन्दर, गाजर, गोभी और नारियल के रस का मिश्रण।</p>
<p style="text-align: justify;">किडनी का दर्दः गाजर, पालक, ककड़ी, अदरक और नारियल का रस।</p>
<p style="text-align: justify;">फ्लूः अदरक, तुलसी, गाजर का रस।</p>
<p style="text-align: justify;">वजन घटाने के लिएः पाइनेपल, गोभी, तरबूज का रस, नींबू का रस।</p>
<p style="text-align: justify;">पायरियाः गेहूँ के ज्वारे, गाजर, नारियल, ककड़ी, पालक और सुआ की भाजी का रस। कच्चा अधिक खायें।</p>
<p style="text-align: justify;">बवासीरः मूली का रस, अदरक का रस घी डालकर।</p>
<p style="text-align: justify;">डिब्बेपैक फलों के रस से बचोः<br />
बंद डिब्बों का रस भूलकर भी उपयोग में न लें। उसमें बेन्जोइक एसिड होता है। यह एसिड तनिक भी कोमल चमड़ी का स्पर्श करे तो फफोले पड़ जाते हैं। और उसमें उपयोग में लाया जानेवाला सोडियम बेन्जोइक नामक रसायन यदि कुत्ता भी दो ग्राम के लगभग खा ले तो तत्काल मृत्यु को प्राप्त हो जाता है। उपरोक्त रसायन फलों के रस, कन्फेक्शनरी, अमरूद, जेली, अचार आदि में प्रयुक्त होते हैं। उनका उपयोग मेहमानों के सत्कारार्थ या बच्चों को प्रसन्न करने के लिए कभी भूलकर भी न करें।</p>
<p style="text-align: justify;">&#8216;फ्रेशफ्रूट&#8217; के लेबल में मिलती किसी भी बोतल या डिब्बे में ताजे फल अथवा उनका रस कभी नहीं होता। बाजार में बिकता ताजा &#8216;ओरेन्ज&#8217; कभी भी संतरा-नारंगी का रस नहीं होता। उसमें चीनी, सैक्रीन और कृत्रिम रंग ही प्रयुक्त होते हैं जो आपके दाँतों और आँतड़ियों को हानि पहुँचा कर अंत में कैंसर को जन्म देते हैं। बंद डिब्बों में निहित फल या रस जो आप पीते हैं उन पर जो अत्याचार होते हैं वे जानने योग्य हैं। सर्वप्रथम तो बेचारे फल को उफनते गरम पानी में धोया जाता है। फिर पकाया जाता है। ऊपर का छिलका निकाल लिया जाता है। इसमें चाशनी डाली जाती है और रस ताजा रहे इसके लिए उसमें विविध रसायन (कैमीकल्स) डाले जाते हैं। उसमें कैल्शियम नाइट्रेट, एलम और मैग्नेशियम क्लोराइड उडेला जाता है जिसके कारण अँतड़ियों में छेद हो जाते हैं, किडनी को हानि पहुँचती है, मसूढ़े सूज जाते हैं। जो लोग पुलाव के लिए बाजार के बंद डिब्बों के मटर उपयोग में लेते हैं उन्हें हरे और ताजा रखने के लिए उनमें मैग्नेशियम क्लोराइड डाला जाता है। मक्की के दानों को ताजा रखने के लिए सल्फर डायोक्साइड नामक विषैला रसायन (कैमीकल) डाला जाता है। एरीथ्रोसिन नामक रसायन कोकटेल में प्रयुक्त होता है। टमाटर के रस में नाइट्रेटस डाला जाता है। शाकभाजी के डिब्बों को बंद करते समय शाकभाजी के फलों में जो नमक डाला जाता है वह साधारण नमक से 45 गुना अधिक हानिकारक होता है।</p>
<p style="text-align: justify;">इसलिए अपने और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए और मेहमान-नवाजी के फैशन के लिए भी ऐसे बंद डिब्बों की शाकभाजी का उपयोग करके स्वास्थ्य को स्थायी जोखिम में न डालें।</p>
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		<title>RAMAYAN IS NOW SCIENTIFICALLY AND ARCHEOLOGICALLY PROVEN</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Amit]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Nov 2015 07:16:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[country]]></category>
		<category><![CDATA[knowledge]]></category>
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					<description><![CDATA[Nasa has already confirmed that &#8220;Ram Setu&#8221; (a rock bridge which was made by banar sena for God Ram) is not natural but man-made. Now researchers says &#8220;Ramayan is a real-life story and we have scientific and archaeological proof.&#8221; According to article of &#8220;the pioneer&#8221; /////Dravidian politicians in Tamil Nadu are famous for their anti-Hindu [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">Nasa has already confirmed that &#8220;Ram Setu&#8221; (a rock bridge which was made by banar sena for God Ram) is not natural but man-made. Now researchers says &#8220;Ramayan is a real-life story and we have scientific and archaeological proof.&#8221;</p>
<p style="text-align: justify;">According to article of &#8220;the pioneer&#8221;</p>
<p style="text-align: justify;">/////Dravidian politicians in Tamil Nadu are famous for their anti-Hindu stance. Anything associated with the religion is anathema to them. Thirumavalavan, a Member of Parliament, went to the extent of changing the name of his father from Ramasamy to Tholkappiyan to flaunt his hatred for Hinduism and Ramayana. DMK chief M Karunanidhi too does not waste the smallest of opportunities to ridicule Hindu Gods. The mainline regional parties in the State always shun Ramayan and Mahabharatha as literary works “penned by Aryan aggressors from the North.”</p>
<p style="text-align: justify;">All these beliefs are set to be shaken when the first International Conference on Ramayana in Literature, Society and Arts begins in Chennai on Friday. The month-long event will feature some of the best scientific and archaeological findings collected by researchers who have rummaged through the sub continent’s landscape and oriental libraries within and outside of India over decades.</p>
<p style="text-align: justify;">M Amirthalingam, a soft spoken botanist who undertook a journey from Ayodhya to Lanka to retrace the life of exile by Ram, Sita and Lakshman found that the flora and fauna mentioned in Ramayan is not a figment of Valmiki’s imagination.</p>
<p style="text-align: justify;">“We found all the plants, trees, flowers and fruits that have been mentioned by the poet in Ramayan. The accounts given by Valmiki about different landscapes, mountains, river basins and forests are accurate. When the Ramayan was being written, there were thick forests in Naimisharanya, Chitrakoot, Dandakaranya and Panchavati. The Kishkindha Kanda of Ramayan discusses the geographical distribution, botanical wealth and forestry,” Amirthalingam, research scientist, CPR Environmental Education Centre, told The Pioneer.</p>
<p style="text-align: justify;">Dr Nandita Krishna, director, CPREEC, said Kishkinta was nothing but Hampi in the Deccan plateau. “The places Ram chose to stay during his exile from Ayodhya were full of plants, vegetations and biodiversity. Valmiki has mentioned dense jungles full of lions and tigers, though the co-existence of the two cats is hard to imagine now,” she said, pointing out that a corollary proof of such habitat was found in the Bhimbedka caves in Madhya Pradesh that has 10,000-year-old wall carvings and paintings featuring lions and tigers.</p>
<p style="text-align: justify;">The seminar will features artists from across the country displaying their craftsmanship in recounting the Ramayan as it happened. Paintings by Raja Ravi Varma, Gond Ram Katha by the tribals drawn from Madhya Pradesh, Madhubani paintings, Stone Age sculptures of 2nd century BC, Patta Chitra by artistes of Odisha and paintings from various South East Asian countries will be on display at the Ramayan exhibition.</p>
<p style="text-align: justify;">‘Our objective is to tell the people in Tamil Nadu that Ramayan is a real-life story and we have scientific and archaeological proof. The poem contains all flora and fauna mentioned in Rig Veda which again reiterates that Ramayan is more than a book. It is a chronicle of tremendous ecological significance and great morality,” said Dr Krishna.</p>
<p style="text-align: justify;">Dr Krishna and Amirthalingam also pointed out to Sanjeevani, the hillock in the tropical forests of Sri Lanka. “The hillock contains exquisite flora, fauna and medicinal plants. It stands distinct from the Lankan topography, giving credence to the theory that Hanuman brought it from the north of the Himalayas,” they said.</p>
<p style="text-align: justify;">The conference will see the re-launching of a rare book on Ram Sethu, the stone-structure believed to be built by Rama and which Karunanidhi wants to demolish at any cost. “The Setu and Rameshwaram” authored by N Vanamamalai Pillai in 1929 with the consent of the then King of Ramnad Shanmuga Rajeswara Naganatha Sethupathi. The kings of Ramnad are addressed as Sethupathis because it is believed that Lord Rama entrusted them with the guardianship of the bridge.</p>
<p style="text-align: justify;">Any seminar on Ramayan will not be completed without the Ram Temple at Ayodhya. AK Sharma, an archaeologist of repute, is presenting a research paper with scientific proof of the existence of a temple on the disputed land.</p>
<p style="text-align: justify;">“Ramayan is no stranger to Tamil Nadu. The literary works of Aka Naanooru and Pura Nanooru of the great Sangam period have a lot of reference to both Ramayan and Mahabharata. Politicians prove their “secular” credentials by insulting and abusing Lord Ram and Lord Krishna only to ensure their vote banks. But Ramayan and Mahabharata will continue to inspire and enlighten the people,” said Ram Mohan, an Indologist of Saraswathi Research Centre, Chennai.//////</p>
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